सार्वभौमिक आचार संहिता/प्रारंभिक 2020 परामर्श ग्रहण/हिन्दी
हिन्दी विकि समुदाय का परिचय
हिन्दी, या सटीक रूप से आधुनिक मानक हिन्दी (IAST/ISO 15919: Mānak Hindī) भारत में बोली जाने वाली एक हिन्द-आर्य भाषा है। एक भाषिका होने के नाते हिन्दी मंदारिन, स्पेनी और अंग्रेज़ी के बाद दुनिया की चौथी सबसे अधिक वक्ताओं वाली भाषा है। उर्दू के साथ मिलकर हिन्दी मंदारिन और अंग्रेज़ी के बाद दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। संविधानिक रूप से हिन्दी भारत की सबसे प्रचलित भाषा है। विश्व हिन्दी सचिवालय के अनुसार फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम, यूरोप, अमेरिका, नेपाल, आदि जगहों में हिन्दी भाषा को समर्पित सम्मेलनों के परिणामस्वरूप वैश्विक मंच पर हिन्दी का एक नया और मज़बूत चरित्र निर्मित हो रहा है।

हिन्दी विकिपीडिया विकिपीडिया का हिन्दी संस्करण है। इसका शुभारंभ 11 जुलाई 2003 को किया गया था। मई 2020 पर इसपर 1,38,128 लेख हैं। मई 2020 तक हिन्दी विकिपीडिया के कुल 5,51,200 से अधिक सदस्यों में से 2,100 से अधिक सक्रिय सम्पादक हैं, 6 प्रबंधक (+2 बॉट खाते), 56 स्वतः परीक्षित, 12 रोलबैकर्स, 14 पुनरीक्षक, और 2 खाता निर्माताएँ हैँ। परियोजना पर लेखों की कुल संख्या है 139057।
हिन्दी विकिपीडिया केवल नक्शे में इंगित क्षेत्रों में ही सम्पादित की और पढ़ी नहीं जाती, बल्कि दूसरे विकियों, जैसे संस्कृत, भोजपुरी, मराठी, नेपाली (देवनागरी लिपि का उपयोग करने वाली भाषाएँ), और साथ में गुरजाती, बंगाली, ओड़िया, पंजाबी आदि के समुदायों के ऐसे सदस्यों द्वारा भी पढ़ी जाती है जिन्हें हिन्दी बहुत अच्छे से आती है और जो हिन्दी परियोजनाओं में योगदान करते हैं।

समुदाय में व्यवहार-संबंधी नीतियों की स्थिति
हिन्दी विकिपीडिया की नीतियाँ "विकिपीडिया:नीतियाँ और दिशानिर्देश" श्रेणी में और "विकिनीतियाँ और दिशानिर्देश" साँचे से सूचीबद्ध हैं। ये व्यवहार-संबंधी नीतियाँ कई पृष्ठों पर जोड़ी गई हैं जैसे:
| हिन्दी विकिपीडिया पर आचरण-संबंधी नीतियाँ |
व्यवहार-संबंधी नीतियों के लगभग सभी पृष्ठ वर्ष 2010 और 2014 के बीच बनाए और अपनाए गए थे। शोध ने बताया कि हिन्दी समुदाय में लागू आचरण की लगभग सभी नीतियाँ बिना किसी चर्चा के अंग्रेज़ी विकिपीडिया से अनुवादित की गई थीं। 'कठपुतलियों' और 'बात समझाने के लिये विकिकार्य बाधित न करें' जैसी कुछ ही नीतियों के लिए छोटी चर्चाएँ हुई थीं मगर उन पर भी बाद में कोई समीक्षा या बदलाव नहीं हुआ है।
हिन्दी समुदाय की सबसे प्रमुख व्यवहार-संबंधी नीतियाँ हैं निषेध नियमावली, निजी टिप्पणियाँ एवं आक्षेप, और बर्बरता। इन नीतियों का कार्यान्वयन हिन्दी समुदाय के लिए एक चुनौती रही है।
आचरण की मौजूदा नीतियाँ समुदाय के वर्ष 2010 से 2014 के बीच सक्रिय सदस्यों द्वारा प्रस्तावित की गई थीं। उनमें से कुछ ही आज सक्रिय हैं और नीतियों की चर्चाओं में भाग लेते हैं।
अनुसमर्थन की प्रक्रिया

हिन्दी समुदाय में अधिकांश चर्चाएँ चौपाल पर होती हैं। मगर यह प्रतीत होता है कि हिन्दी समुदाय सामान्यतः संस्थान द्वारा शुरू की गई चर्चाओं या फिर ऐसे विषयों पर चर्चाओं में भाग नहीं लेता है जो सीधे हिन्दी विकियों से संबंधित न हों। हिन्दी विकियों के सदस्य खुली चर्चाओं में अपनी राय व्यक्त नहीं करते। यह सभी सम्पादकों पर लागू है, चाहे वे पुराने/अनुभवी सम्पादक हों या फिर नवागंतुक। लेकिन अगर प्रस्तावित चर्चाएँ 'सम्पादन' या सदस्य अधिकारों के बारे में हो तो फिर समुदाय के सदस्य चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। 'स्वतः परीक्षित सदस्य' और 'वर्तनी में गलतियाँ' जैसे विषयों को तक बहुत ध्यान मिलता है, मगर 'आचरण' की चर्चाओं के साथ ऐसा नहीं है।

अनुसमर्थन की प्रक्रिया के लिए UCoC के बारे में चर्चा का एक आह्वान हिन्दी विकि के चौपाल, हिन्दी विकिमीडियाई सदस्य समूह के वार्ता पृष्ठ और हिन्दी विकिविश्वविद्यालय के चौपाल पर किया गया था। मगर इन तीनों पोस्ट्स पर कुल मिलाकर बस एक ही टिप्पणी आई, जो कि परियोजना से संबंधित नहीं थी, बल्कि विषय पर एक गोपनीय वार्तालाप का एक अनुरोध थी।

कुछ और सदस्य परियोजना के बारे में आमने-सामने बातचीत के लिए तैयार हुए। वे चर्चाओं के लिए या तो टेलीफ़ोन पर बातचीत या फिर वैयक्तिक बैठकों में भाग लेने में अधिक सहज महसूस करते थे। इसलिए मैंने अनुभवी सम्पादकों के साथ फ़ोन कॉल का इंतज़ाम किया, उन्हें UCoC के पीछे का विचार समझाया, और इस विषय पर मेटा पृष्ठ उनके साथ साझा किया। मैंने उन्हें सारी जानकारी पढ़ने के लिए कुछ दिन दिए ताकि वे बाद में एक संगठित राय लेकर मेरे पास वापस आ सकें। कुछ लोगों ने मूल्यवान अंतर्दृष्टियाँ साझा कीं, मगर प्रतिक्रिया का दर काफी कम था क्योंकि मैं जिन लोगों के साथ बात की उनमें से कई COVID-19 की परिस्थिति से आई निजी समस्याओं का सामना कर रहे थे। प्रतिक्रिया पाने के लिए मुझे कई कॉल्स करने पड़े।
और भी उत्तर की उम्मीद करते हुए मैंने चौपाल पर एक Google फ़ॉर्म साझा किया और यही फ़ॉर्म सामूहिक संदेश के माध्यम से भी भेजा।
प्रतिक्रिया दर
197 संपर्कित सदस्यों में से केवल 28 (14.21%) ने उत्तर दिया।

भाग लेना आसान बनाने के लिए मैंने एक सर्वेक्षण फ़ॉर्म बनाया जिसे भरना आसान था, भरने में बिलकुल समय नहीं लगता था, जिसमें लक्षित प्रश्न थे और जिसमें उत्तर स्थानीय भाषाओं में दिए जा सकते थे। मैंने यह फ़ॉर्म पहले उन सदस्यों को दिया जिन्होंने आमने-सामने बातचीत का अनुरोध किया था, और यही फ़ॉर्म बाद में समुदाय के दूसरे सक्रिय सदस्यों को भी सामूहिक संदेशों के माध्यम से भेजा। मैंने उन सदस्यों से भी संपर्क करने का प्रयास किया जो कुछ वर्ष पहले सक्रिय थे और जिन्होंने अभी तक योगदान करना बंद नहीं किया है।
मैंने 'हाल में हुए बदलावों' को एक हफ्ते तक सेट करके उसका उपयोग करके कुछ सक्रिय सम्पादकों को प्रत्यक्ष संदेश भेजे और वार्ता पृष्ठ के माध्यम से हिन्दी विकिमीडियाई सदस्य समूह के सदस्यों से संपर्क किया मगर किसी ने उत्तर नहीं दिया।
समुदाय की प्रतिक्रिया
UCoC की प्रतिक्रिया बहुत स्वागतमय थी; उनमें से कुछ चाहते थे कि UCoC जल्द मगर प्रभावशील रूप से लागू हो। हमें यह पाई-चार्ट में दिख जाता ह; 89% से अधिक ने समर्थन किया और 7% (2 प्रतिक्रियाएँ) तटस्थ थे। इससे 3.6 प्रतिशत का विरोध बचता है।
UCoC पर सकारात्मक प्रतिक्रिया — 28 में से 25
UCoC के बारे में चिंताएँ — 1
सकारात्मक प्रतिक्रिया मगर कुछ अपवादों के साथ — 2

एक प्रतिक्रिया "UCoC में नाबालिगों के साथ क्या इंतज़ाम किया जाएगा"
दिलचस्प कहानियाँ
चर्चाएँ बहसों और विवादों में बदल जाती हैं
हिन्दी विकिपीडिया पर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चाएँ अक्सर बहसों में बदल जाती हैं और सामान्यतः किसी निर्णय या निष्कर्ष पर नहीं आती हैं, जैसे सम्पादन की विधि, मतदान की सर्वसम्मति, सामग्री या शब्दावली का प्रयोग आदि। साथ ही, इनमें से कई चर्चाएँ विवादों में बदल जा सकती हैं और उत्पीड़न तथा बुलीयिंग को अंजाम दे सकती हैं। ये इस हद तक पहुँच सकती हैं कि लोग एक दूसरे की धार्मिक पूर्वपीठिकाओं और विचारधाराओं की बात उठाने लगते हैं और गाली-गलौज करने चहते हैं, जो कि एक स्वस्थ कार्य वातावरण के लिए अच्छा नहीं है और सदस्यों को विकिपीडिया पर योगदान करने से बाधित करता है और साइट छोड़ने पर मजबूर करता है।
उसी तरह, हिन्दी विकिपीडिया पर 'जातियों' के बारे में लेख भी विवाद का विषय बन चुके हैं। ऐसी चर्चाओं में उलझने वाले सम्पादक आम तौर पर नवागंतुक होते हैं। वे अपनी जाति को दूसरी जातियों से ऊपर दिखाने के लिए अलग-अलग जातियों के लेखों पर बर्बरता फैलाना शुरू करते हैं। जब अनुभवी सदस्य उन्हें अपनी गलतियों का एहसास कराने की कोशिश करते हैं तब चर्चा अक्सर बहस में बदल जाती है। अनुभवी सदस्य इसलिए ऐसी चर्चाओं में उलझने से बचते हैं और जाति-संबंधी लेखों को बर्बरता से बचाने के लिए 'पृष्ठ सुरक्षा' का प्रयोग करते हैं। मगर यह अक्सर नवागंतुकों को और भी गुस्सा दिला देता है, जिससे और भी गंभीर बहस होती है और अंत में नवागंतुक अवरोधित हो जाता है। यह एक कभी न खत्म होने वाला चक्र है।
कई बार अपने उत्पादों तथा YouTube, Facebook, Instagram आदि पर चैनलों को बढ़ावा देने के लिए योगदानकर्ताएँ बेकार के विवादों में उलझ जाते हैं जिससे उन्हें अवरोधित कर दिया जाता है और उनके लेखों और सम्पादनों को हटा दिया जाता है या फिर उन पर निगरानी रखी जाती है।
सदस्य अधिकारों पर चर्चा में हुए विवाद
हिन्दी विकिपीडिया 'सदस्य अधिकारों' को बहुत गंभीरता से लेता है। इन चर्चाओं और 'सदस्य अधिकारों' की चर्चाओं के दौरान अक्सर ये चर्चाएँ विवाद और बहस में बदल जाती हैं। कुछ सदस्य भिन्न रायों वाले अल्पसंख्यकों के विरुद्ध दल बाँधकर उनके विरुद्ध गाली-गलौज करते हैं और समुदाय के लाभ के बारे में सोचने के बजाय सिर्फ वही समर्थित करते हैं जो उन्हें लगता है कि उनके लिए सही है।
निष्कर्ष
हिन्दी समुदाय विविधतापूर्ण है। यहाँ के अधिकतर योगदानकर्ताओं को भाषा के प्रति गहरी प्रशंसा और सम्मान है। यहाँ योगदानकर्ताएँ अलग-अलग संस्कृतियों, शिक्षा के स्तरों, परिवारों, और कार्य पूर्वपीठिकाओं से आते हैं।
हिन्दी समुदाय ने एक सार्वभौमिक आचार संहिता के विचार का स्वागत किया है। समुदाय ने इसे सिर्फ समर्थित ही नहीं किया, बल्कि आंदोलन में इसकी आवश्यकता को भी उल्लिखित किया है।
During the consultation, many users expressed that because there is a lack of effective conduct policies on Hindi wiki, users are usually unable to put forth their opinion in discussions as they want to avoid toxic arguments. Also, it was brought to my attention that a number of new and senior editors have left Hindi Wikipedia after having suffered some form of harassment. It was pointed out to me that some editors abuse the existing policies and create an editing environment which is favourable to some editors while toxic for others. And this often prevents new members from making contributions. Older members who hold a different opinion also face harassment due to lack of concrete rules, regulations, and code of conduct.
Some members believe that only when something ‘noticeable’ happens, they should go to the 'Trust and Safety Team'. Apart from this, they often do not approach the 'Trust and Safety Team' for help because of privacy issues. Some members also highlighted that the current Hindi user group is trying to assert its monopoly over the Hindi wiki and prevent other members from going ahead and working, including causing hindrance to conduct online/offline programs.
Some contributors also had issues of ‘credit theft’ as their edits and work are appropriated by others, i.e. 'Outsiders' (other than Hindi community) who may have not contributed noticeably to a said topic try and relate it to their work done by them in the past and take credit by publicizing it in their own name.
सुझाव
It was frequently suggested that issues related to harassment and bullying should be handled more actively. The code should have clear and specific guidelines against such issues. Among the main reasons behind editors quitting Hindi wiki is the authoritative behaviour of a few senior editors. They bully and harass newbies in order to create their monopoly. Thus, it was repeatedly suggested during the discussions that the committee enforcing UCoC should not be biased and the selection process for the same should be transparent. Some members also believed that most external members (other than Hindi community) should be selected to avoid any kind of bias, without including local wiki contributors, editors or managers in this type of committee.
It was also suggested that admins should not be tasked with UCoC enforcement responsibilities. Many editors do not feel comfortable about admins, bureaucrats and editors with special rights having more rights, which they feel can be misused. The UCoC should also address scenarios such as, what would happen if the local Wikis created more comprehensive rules than UCoC. Would that make UCoC powerless or inactive?
कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि आचार संहिता में विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों जैसे युवा सम्पादकों की समस्याओं से जुड़ी कुछ नीतियाँ होनी चाहिए।
Another suggestion was to have an arbitration committee in which the local wiki editors should either not be allowed to participate or should not be in majority to avoid partiality and groups or factionalism. Decentralization of power/authority was also suggested, members were concerned that only certain people should not have more rights so that they can consider themselves as the superiors.
The members appreciated that the reading material on UCoC was translated to Hindi which made it easy for them to comprehend. They expect the final code of conduct to be translated into local languages.
It is heartening that the women participants in this discussion put forth their views and emphasized the need that female editors should be specially informed about these kinds of policy discussions. Every small and big conference should have a women's grievance team so that women can report their problems without hesitations. Universal code of conduct should be proactively published on all those places, whether online or offline, where there is a possibility of conduct violations.
अंततः हिन्दी समुदाय के अधिकांश सदस्यों ने एक सार्वभौमिक आचार संहिता के विचार का स्वागत किया। समुदाय ने कुछ प्रश्न उठाए और निम्न मुद्दों पर स्पष्टता का अनुरोध किया:
- Compliance and enforcement process of the UCoC, periodic review of the code and its compliance.
- What kind of process will be followed to set up a committee?
- How will UCoC address issues like groupism or factionalism, toxic environments, etc?
- How will the UCoC encompass policies that protect the rights of young editors/students?
Though the Hindi community is not new to me, still, through UCoC discussions with community members, I got an opportunity to learn untouched aspects of their feelings, their apprehensions and fears. These things are generally ignored in our wiki life. During this consultation, I got to know my community deeply, learned new things. I am grateful to everyone and hope that the Hindi community and their views, concerns, and suggestions will be considered while drafting the universal code of conduct.